Holy Scriptures

Wednesday, 15 July 2020

कावड़ यात्रा

  कावड़ यात्रा क्या है
हर साल श्रावण मास में करोड़ो की तादाद में कांवडिये सुदूर स्थानों से आकर गंगा जल से भरी कांवड़ लेकर पदयात्रा करके अपने गांव वापस लौटते हैं इस यात्राको कांवड़ यात्रा बोला जाता है।
कांवड के माध्यम से जल की यात्रा का यह पर्व सृष्टि रूपी शिव की आराधना के लिए हैं।

इस क्रिया में श्रावण मास में लाखों की तादाद में कांवड़िये सुदूर स्थानों से पदयात्रा करके गंगा जल से भरी कांवड़ लेकर आते है और श्रावण की चतुर्दशी के दिन उस गंगा जल से शिव मंदिरों में शिव जी का अभिषेक किया जाता है। 


इसके आधार पर, कांवड़ धार्मिक प्रदर्शनों की एक शैली को संदर्भित करता है, जहां से श्रद्धालु पवित्र गंगा नदी से पानी ले जाते हैं।

यद्यपि कांवड़ का ग्रंथों में एक संगठित उत्सव के रूप में उल्लेख नहीं है, लेकिन यह घटना निश्चित रूप से 19वीं सदी की शुरुआत में हुई होगी जब अंग्रेजी यात्रियों ने उत्तर भारतीय मैदानों में अपनी यात्रा के दौरान कई स्थानों पर कांवड़ तीर्थयात्रियों को देखा। 


यह यात्रा 19 के दशक के उत्तरार्ध तक कुछ संतों और पुराने भक्तों द्वारा चलाया गया एक छोटा सा मामला हुआ करती थी, जब इसने लोकप्रियता हासिल करना शुरू कर दिया

इस में श्रद्धा कम और अंध विश्वास अधिक प्रतीत होता है

जैसे कि श्री शिवमद् देवी भागवत के 3 स्कंद पृष्ठ नम्बर 123 पर विष्णु जी माता दुर्गा जी से स्वयं कह रहे है कि " मैं, ब्रह्मा और शंकर आप की कृप्या से ही उत्पन्न हुऐ हैं और हमारा तो जन्म व मरण भी होता हैं!"


तो यहाँ विचार करने वाली बात है कि जब ब्रह्मा जी, विष्णु जी और शिव जी की जन्म व मृत्यु हो रही हैं तो उन्हें सुख कैसे हो सकता है?

और उनकी भक्ति करने वाले अनुयायी तो फिर कभी मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकते तथा न ही कभी सुखी रह सकते!

उन्हें मिलने वाले सुख तो उनके प्रारब्ध में की गई भक्ति कमाई का ही परिणाम हैं!

अर्थात् कांवड़ ले जाने वाले श्रद्धालु केवल देखा देखी की भक्ति ही कर रहे हैं!


क्योंकि कांवड़ यात्रा के दौरान पुण्य कम और पाप ज्यादा लगते है!


गीता जी अध्याय 6 श्लोक 46 में भी कहा है कि "शास्त्र विरूद्ध साधना करने वाले कर्मयोगी से शास्त्रविद् योगी श्रेष्ठ है।

गीता जी अध्याय 4 श्लोक 33 व श्लोक 34 

इसी प्रकार श्री शिव महापुराण पृष्ठ सं. 24 से 26 विद्ध्वेश्वर संहिता तथा पृष्ठ 110 अध्याय 9 रूद्र संहिता


में स्पष्ट प्रमाण है कि "पूर्ण परमात्मा कबीर जी ही पूजा के योग्य हैं तथा ब्रह्मा, विष्णु, शिव जी तो नाशवान प्रभु है उनकी भक्ति पूर्ण मोक्षदायक नही है।"





आज संत रामपाल जी महाराज ही विश्व में एक मात्र पूर्ण संत है जो सर्व शास्त्रों, गीता जी, वेदों, पुराणों, उपनिषदों एवं पवित्र कुरान और पवित्र बाइबिल तथा श्री गुरु ग्रंथ साहब जी में छुपे हुए गुढ रहस्यों को सर्व मानव समाज को प्रोजेक्टर के माध्यम से समझा रहे हैं!


यदि आप भी संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संग सुनना चाहते हैं तो अवश्य देखे 'साधना' टी.वी. चैनल शाम 7:30 बजे से!


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Wednesday, 10 June 2020

Bible

Bible

पवित्र बाईबल से सिद्ध होता हैं कि परमात्मा मानव सदृश्य शरीर मे है जिसने छः दिन में सर्व सृष्टि की रचना की तथा फिर विश्राम किया

Thursday, 4 June 2020

5जून_महासत्संग_साधनाTVपर
5thJuneKabirPrakatDiwas
कबीर परमेश्वर ने बताया कि परमात्मा सभी पापों से मुक्त कर सकता है।
कबीर परमात्मा चारों युगों में प्रकट होते हैं
सतयुग में सत सुकृत नाम से,
त्रेता में मुनीन्द्र नाम से,
द्वापर में करुणामय नाम से,
और कलयुग में अपने असली नाम कबीर नाम से प्रकट होते हैं।

Tuesday, 2 June 2020

#कबीरपरमेश्वर_की_लीलाएं
एक बार द्रौपदी ने अंधे महात्मा को अपनी साड़ी के कपड़े में से टुकड़ा दिया था क्योंकि अंधे महात्मा की कोपीन पानी में बह गई थी। साधु ने आशीर्वाद अनंत चीर पाने का आशीर्वाद दिया। कबीर परमात्मा ने चीरहरण में द्रौपदी का चीर बढ़ाकर लाज बचाई।
#3दिन_बाद_कबीरप्रकटदिवस

Sunday, 31 May 2020


कबीरपरमेश्वर_के_साथ_52बदमाशी
कबीर परमेश्वर को शेखतकी ने उबलते हुए तेल में बिठाया। लेकिन कबीर साहेब ऐसे बैठे थे जैसे कि तेल गर्म ही ना हो। सिकन्दर बादशाह ने तेल के परीक्षण के लिए अपनी उंगली डाली, तो उसकी उंगली जल गई। लेकिन अविनाशी कबीर परमेश्वर जी को कुछ भी नहीं हुआ।


 हाथी कबीर भगवान के पास जाते ही डर कर भाग गया। तब लोगों ने कबीर साहेब की जय-जय कार की। कबीर भगवान अविनाशी है।


"शेखतकी द्वारा कबीर साहेब को गहरे कुँए में डालना"
शेखतकी ने कबीर साहेब को बांध कर गहरे कुँए में डाल दिया, ऊपर से मिट्टी, ईंट और पत्थर से कुँए को पूरा भर दिया। फिर शेखतकी सिकन्दर राजा के पास गया वहां जाकर देखा तो कबीर परमेश्वर पहले से ही विराजमान थे।

5 June कबीर प्रकट दिवस
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Friday, 29 May 2020

चारोंयुग_में_आए_कबीरपरमेश्वर
पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) वेदों के ज्ञान से भी पूर्व सतलोक में विद्यमान थे तथा अपना वास्तविक ज्ञान (तत्वज्ञान) देने के लिए चारों युगों में भी स्वयं प्रकट हुए हैं।

कबीर परमात्मा अन्य रूप धारण करके कभी भी प्रकट होकर अपनी लीला करके अन्तर्ध्यान हो जाते हैं।

Wednesday, 20 May 2020




संत रामपाल जी महाराज का समाज सुधार में योगदान


संत रामपाल जी महाराज का आज समाज सुधार में महत्वपूर्ण योगदान है  भ्रष्टाचार, दहेज प्रथा ,नशा  ,तंबाकू का सेवन , जात पात का भेदभाव आदि को दूर कर के एक अच्छा समाज सुधार कर रहे हैं समाज मे फैली कुरीतियों जात पात के भेदभाव को जड़ से मिटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं

दहेज प्रथा एक सामाजिक कलक
लाखो रुपये ख़र्च कर एक पिता अपनी बेटी को घर से विदा करता है यही सोच कर की उसकी बेटी सुखी रहेगी  पर कुछ टाइम बाद उसी बेटी की दहेज लोभियों द्वारा हत्या कर देने की खबर सुन कर क्या  सोचो क्या बितती होगी उनके दिल पर
संत रामपाल जी के शिष्य ना दहेज लेते हैं ना देते हैं  और विवाह में ज्यादा ख़र्च नही करते हैं संत रामपाल जी महाराज ओर उनके शिष्य दहेज मुक्त समाज मे महत्वपूर्ण योगदान निभा रहे हैं।





भूखे को भोजन
संत रामपाल जी महाराज के शिष्य वर्तमान परिस्थितियों में असहाय लोगो की मदद कर रहे हैं उन तक भोजन पहुचा रहे हैं


संत रामपाल जी महाराज जीव हिस्सा करने किसी तरह का नशा करने से मना करते हैं रिसवत लेने और देने से मना करते हैं



आज सन्त रामपाल जी महाराज समाज सुधार में महत्वपूर्ण योगदान निभा रहे हैं

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कावड़ यात्रा

  कावड़ यात्रा क्या है हर साल श्रावण मास में करोड़ो की तादाद में कांवडिये सुदूर स्थानों से आकर गंगा जल से भरी कांवड़ लेकर पदयात्रा करके अपन...